STREET ANIMALS क्या है?
जब हम बात करते है कि STREET ANIMALS की समस्या को कैसे सुलझाया या हल किया जाये, तब हमें जानना होगा कि STREET ANIMALS कौन है?
हम अक्सर अपने आसपास व गली मौहल्लो में कुत्ते, बिल्ली, गाय, सांड व अन्य तरह के पशु देखते है जो हमें अपने आस पास अक्सर दिखाई पडते है ये जानवर कही भी आ सकते है और अपनी मर्जी से कहीं भी जा सकते है जैसे मंदिरो के पास, स्कूल, कॉलेज के आसपास, पार्को में, गली मौहल्लो में, सड़को पर, रेलवे लाईनों के आसपास या खुले मैदानों में, ये स्वतंत्र रूप से घूमते फिरते दिखाई देते है, मनुष्य इन जानवरो को कभी कभी खाना पीने के लिये पानी व इनको अपने साथ भी रख लेते है और इनकी देखरेख व इनका पालन पोषण भी करते है लेकिन इनकी आबादी दुनियाँ में अन्य जानवरों की अपेक्षा बहुत ज्यादा होती है अधिकतर कुत्ते, गाय, सांड ऐसे जानवर है जो सड़कों व चौराहों पर देखने को मिल जायेगें ये मनुष्य को किसी प्रकार की कोई हानि नही पहुँचाते है बल्कि कभी कभी इनको ही मनुष्य के क्रोध का सामना करना पड़ता है और इनके साथ क्रूरता की खबरे अखबार आदि के द्वारा सुनने को मिलती रहती है इसमें कुत्ते व गाय बहुत संवेदनशील प्राणी होते है जिनके साथ अच्छा व्यवहार करके इनको प्यार देकर अपना अच्छा मित्र भी बनाया जा सकता है ये ही जानवर STREET ANIMALS कहलाते है।
आवारा पशुओं की समस्या का समाधान कुत्तो की बढती जनसंख्या को रोकना
इनकी समस्या का समाधान इनकी ज्यादा से ज्यादा नसबंदी और टीकाकरण करना है लेकिन समय पर नसबंदी या लगातार नसबंदी या टीकाकरण न करना इनकी बढती जनसंख्या को जन्म देना है। पूरे भारत में एबीसी (एनिमल बर्थ कर्न्टोल) कार्यक्रम चलाया जाता है जिसमें राज्य सरकारे अपने अपने स्तर पर प्रत्येक जिले में एबीसी कार्यक्रम चलाती है जिसमें नगर निगम व नगरपालिका को इनकी बढ़ती जनसंख्या को रोकने का कार्य दिया जाता है और ये विभाग नसबंदी व टीकाकरण जैसी योजनाओं को चलाते है लेकिन आज आजादी के बाद भी इस समस्या का कोई अच्छा परिणाम देखने को नही मिला और इनकी जनसंख्या लगातार बढती ही जा रही है। यदि इनकी जनसंख्या को रोकना है और अच्छे आंकडे जुटाने है तो उपरोक्त विभागों को पादर्शिता, लगन, महनत, ईमानदारी से युद्ध स्तर पर कार्य करना होगा तभी इस समस्या को सुलझाया जा सकता है और STREET ANIMALS की समस्या को सुलझाया जा सकता है।
नियमित रूप से एबीसी सेन्टर चलाना
जब सवाल आता है कि इनकी जनसंख्या क्यों प्रतिदिन बढ रही है तो हम पाते है कि नगर निकायों द्वारा नियमित रूप से एबीसी प्रोग्राम न चलाना उसमें हिला हवाली करना या पारदर्शिता न बरतना या काम से वचना आदि मुख्य बिन्दु मिलते है इसलिये इनकी जनसंख्या लगातार बढती रहती है इसके लिये लगातार नियमित रूप से एबीसी सेन्टर चलाना और टीकाकरण करके ही इनकी बढती जनसंख्या पर अंकुश लगाया जा सकता है। जो सबसे बडा विकल्प मौजूदा व्यवस्था में लागू है लेकिन उसमें काफी कमियाँ देखने को मिलती है और Street डॉग की जनसंख्या बढती रहती है।
पालतू पशुओं का त्याग
यदि हमे कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या पर नियन्त्रण पाना है तो हमे देशी ब्रीड के कुत्तो को गोद लेना होगा, और अपने शौक आदि के लिये विदेशी कुत्तो का परित्याग करना होगा लेकिन अकसर देखा गया है कि लोग देशी कुत्तो यानि Street डॉग को नकारते है और विदेशी किस्म के डॉग आदि को गोद लेते है जिससे इनकी आबादी बढ़ती है।
कुडे कचरे का प्रबन्ध
अक्सर देखा गया है कि जगह जगह कुडे के बडे बडे ढे़र होते है वहाँ पर कुत्ते ही नही बल्कि गाय या सांड जैसे प्राणी भी भोजन की तालाश में इकटठा हो जाते है यदि इस कचरे का प्रबन्ध सही तरीके से हो जाये या कुडा कचरा सड़क पर न दिखाई दे इसके प्रबन्ध की पूर्ण व्यवस्था हो जाये तो ये STREET ANIMALS एकत्र नही होगें इससे इनकी पहचान करना और उनकी संख्या को मोनिटरिगं कर इनकी बढती जनसंख्या पर अंकुश लगाया जा सकता है।
जन जागरूकता और शिक्षा
लोगो में जागरूकता की कमी होना या ऐसे कार्यक्रमो का आयोजन न करना जिससे इनके प्रति लोगो में सवेदशीलता पैदा हो, इनकी बढ़ती जनसंख्या का कारण है, हमे लगातार ऐसे प्रोग्राम आयोजन करने होगें जिससे लोग देशी नस्ल के कुत्ते के प्रति स्नेह व लगाव रखे। इसके लिये लोगो को स्कूली स्तर व सामाजिक स्तर पर शिक्षित करना होगा।
गायों की बढती जनसंख्या को रोकना
अकसर देखा गया है कि गायों की जनसंख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है ये गाय पशुपालकों या डेयरी वालो द्वारा छोड दी जाती है और ये ही गाय बडे शहरो में सडको पर या कुडे के ढेरों पर खाना ढूढंती हुयी दिखाई देती है।
अगर बात की जायें कि गायों की बढती जनसंख्या को कैसे रोका जाये तब इसके लिये पशु पालकों व डेयरी वालो को स्वयं जिम्मेदार और समझदार होना होगा अपने निजी स्वार्थ के लिये किसी को पीडा व नुकसान पहुँचाना बन्द करना होगा जो जागरूकता व दया से ही सम्भव है जिसमें किसान व आम जनमानस भी शामिल है और उनको उन गायों के लिये जो दूध देना बन्द कर देती है या फिर बुढी या बीमार हो जाती है। उनके गोबर आदि से नये उत्पाद तैयार किये जा सकते है गौबर से खाद तैयार किया जा सकता है जो प्राकृतिक खाद कहलाता है
डेयरी उत्पादों का कम मात्रा में प्रयोग करना
डेयरी प्रोडक्ट का बहिष्कार करना होगा अगर डेयरी प्रोडेक्ट की डिमांड मनुष्य ज्यादा करेगा तो इनकी जनसंख्या भी बढेगी और इनका शोषण भी होगा। हमे घी, दूध, मक्खन, पनीर, मेवा आदि का कम मात्रा में प्रयोग करना होगा हो सके तो बिल्कुल ही शून्य करना होगा क्योंकि वर्तमान समय में गाय की बढ़ती जनसंख्या विस्फोटक से कम नही है क्योंकि मनुष्य की बढती जनसंख्या और उसकी डेयरी प्रोडेक्ट की डिमांड ने गाय की जनसंख्या को बढा दिया है और यहि कारण है कि STRAY COW की जनसंख्या अधिक है।